वैज्ञानिकों का कहना है कि ब्लैक कार्बन गंगोत्री ग्लेशियर के पिघलने को प्रभावित कर सकता है

Last Updated: March 4, 2020

Free Current Affairs to Your Email
04 March 2020 Current Affairs: वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी (डब्ल्यूएएचजी) के वैज्ञानिकों ने कहा कि गंगोत्री ग्लेशियर में ब्लैक कार्बन सांद्रता गर्मी के दौरान 400 गुना बढ़ गई थी।

रिपोर्ट की मुख्य विशेषताएं:
- अध्ययन ने सुझाव दिया कि इस मौसमी वृद्धि का कारण कृषि जलाना और जंगल की आग है।
- कृषि जलने और जंगल की आग के साथ, सर्दियों में प्रदूषकों की लंबी दूरी के परिवहन, ग्लेशियर के पिघलने को भी प्रभावित करते हैं।
- ब्लैक कार्बन की प्रकाश-अवशोषित प्रकृति ग्लेशियल पिघल को ट्रिगर कर सकती है।
-- गंगोत्री ग्लेशियर के पास चिरबासा स्टेशन पर हुए एक अध्ययन में पाया गया कि ब्लैक कार्बन (BC) सांद्रण   वर्ष 2016 के लिए सर्दियों में 0.01μgm से 3 और गर्मी में 4.62μgm से 3 में बदल गया।

समतुल्य ब्लैक कार्बन (EBC):
EBC एरोसोल अपने हल्के अवशोषित प्रकृति के कारण ग्लोबल वार्मिंग में महत्वपूर्ण योगदान देता है। हिमालयी ग्लेशियर घाटियों की तरह ईको-सेंसिटिव जोन में EBC की मौजूदगी की निगरानी सावधानीपूर्वक की जानी चाहिए। हालांकि, ईबीसी पर बेसलाइन डेटा शायद ही कभी हिमालय क्षेत्र के अधिकांश ग्लेशियर से उपलब्ध हो।

Subscribe to Current Affairs

Enter your email to get daily Current Affairs

Monthly Current Affairs PDF